उषा प्रियंवदा
गजाधर बाबू ने कमरे में जमा सामान पर एक नज़र दौड़ाई -- दो बक्से, डोलची, बालटी -- ''यह डिब्बा कैसा है, गनेशी?'' उन्होंने पूछा। गनेशी बिस्तर बाँधता हुआ, कुछ गर्व, कुछ दु:ख, कुछ लज्जा से बोला, ''घरवाली ने साथ को कुछ बेसन के लड्डू रख दिए हैं। कहा, बाबूजी को पसन्द थे, अब कहाँ हम गरीब लोग आपकी कुछ खातिर कर पाएँगे।'' घर जाने की खुशी में भी गजाधर बाबू ने एक विषाद का अनुभव किया जैसे एक परिचित, स्नेह, आदरमय, सहज संसार से उनका नाता टूट रहा था।
''कभी-कभी हम लोगों की भी खबर लेते रहिएगा।'' गनेशी बिस्तर में रस्सी बाँधते हुआ बोला।
''कभी कुछ ज़रूरत हो तो लिखना गनेशी! इस अगहन तक बिटिया की शादी कर दो।''
गनेशी ने अंगोछे के छोर से आँखे पोछी, ''अब आप लोग सहारा न देंगे तो कौन देगा! आप यहाँ रहते तो शादी में कुछ हौसला रहता।''
गजाधर बाबू चलने को तैयार बैठे थे। रेल्वे क्वार्टर का वह कमरा, जिसमें उन्होंने कितने वर्ष बिताए थे, उनका सामान हट जाने से कुरूप और नग्न लग रहा था। आँगन में रोपे पौधे भी जान पहचान के लोग ले गए थे और जगह-जगह मिट्टी बिखरी हुई थी। पर पत्नी, बाल-बच्चों के साथ रहने की कल्पना में यह बिछोह एक दुर्बल लहर की तरह उठ कर विलीन हो गया। Listen Audio Playback click here or
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Sunday, 16 December 2012
Thursday, 13 December 2012
आज की नवीं कक्षा की परीक्षा
ചോദ്യപേപ്പര്, സാമാന്യനിലവാരം പുലര്ത്തിയെന്നു പറയാം. ഒന്നാമത്തെ യൂണിറ്റില് നിന്ന് 10 ശതമാനം ചോദ്യങ്ങളും 3,4 യുണിറ്റുകളില് നിന്ന് 90 ശതമാനം ചോദ്യങ്ങളുമെന്നായിരുന്നു കേട്ടത്. ചോദ്യപേപ്പര് കണ്ടപ്പോള് ശതമാനക്കണക്ക് ശരിയല്ലെന്ന് തോന്നി.
- കോഡ് B കൊല്ലം ജില്ലയിലെ ചോദ്യപേപ്പര് download from here
- കോഡ് A മലപ്പുറം ജില്ലയിലെ ചോദ്യപേപ്പര് download from here
Thursday, 6 December 2012
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